Towards understanding self from knowledge perspective, with compassion to contemporary identities and ideations towards richer ones.
कहाँ ? सदियों बाद दिख रहे हैं आप :)
हाँ, कभी दफ्तर कभी घर बार ही चिंता में खोया था,अब भी नहीं जानता खोयी दुनिया थी या सिर्फ मैं खोया था. :)
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2 टिप्पणियां:
कहाँ ? सदियों बाद दिख रहे हैं आप :)
हाँ, कभी दफ्तर कभी घर बार ही चिंता में खोया था,
अब भी नहीं जानता खोयी दुनिया थी या सिर्फ मैं खोया था. :)
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