सोमवार, मई 02, 2011

सिर्फ ज़िन्दगी और कुछ भी नहीं

बड़ी हसीं ज़िन्दगी गुज़र रही है, 
जितना सोचा था उससे कहीं अच्छी निकल रही है 
ढेरों चाहतें , चाहतों से लिपटी कशिश और कोशिशें,
सब खाक हो गयीं हैं, बस केवल ज़िन्दगी बच रही है
बड़ी अच्छी ज़िन्दगी गुज़र रही है. 

बहुत दिनों तक बहुत कुछ चाहता रहा 
खुद ज़िन्दगी को चाहने का मौका निकलता गया
मलाल अब इतना रह गया है
ज़िन्दगी ने मेरी बेवफाई पर कभी कुछ भी नहीं कहा है

शुरू से सोचा था, अर्थ को खोजा था, बस यहीं चूक हो गयी थी,

जिन्दा रह के ज़िन्दगी के सिवा सब के लिए तड़प थी,
बस ज़िन्दगी की ही इज्ज़त नहीं रह गयी थी,

मसालों से तंग व्यंजनों में, स्वाद सब्जी का खोजा ,
चाहतों से लिपटी ज़िन्दगी में, अर्थ ज़िन्दगी का खोजा. 

अच्छा हुआ कुछ मिला नहीं, रही कुछ चाहत भी नहीं
अब हम भी नहीं है, किसी अर्थ की तलाश भी नहीं
बस ज़िन्दगी बच गयी है, कुछ शर्मिंदगी बच गयी है,
सच में बड़ी अच्छी ज़िन्दगी लग रही है.









2 टिप्‍पणियां:

Navendu ने कहा…

:-) Hare Krishna

saurabh ने कहा…

:-) Hare Krishna