हरे कृष्ण !
शायद संस्कृति कि संवाहक अपनी सांस्कृतिक भाषा ही हो सकती है अंग्रेजी में बहुत प्रयास के बावजूद लगता है जो कहना चाहता हूँ उसका भाव संप्रेषित नही हो पाया है मुझे ख़ुशी है कि ब्लोग कि दुनिया में हिन्दी भाषा का उपयोग संभव है
हरे कृष्ण !
शनिवार, दिसंबर 08, 2007
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