खुदा को खुदी से प्यार का बहाना चाहिए था ,
सो हम तुम को ख़ुद से बांटकर,
और थोड़ा कांट छाँट कर,
एक दूसरे से रु-ब-रु खड़ा कर दिया,
अफसोस हम खुदाई नूर को उम्रभर तलाशते रहे ,
मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजों में भटकते रहे,
और खुदा हमारे प्यार को तरसते रहे।
Towards understanding self from knowledge perspective, with compassion to contemporary identities and ideations towards richer ones.
2 टिप्पणियां:
kya bat hai.....
वाह! बहुत बढ़िया.
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