मंगलवार, जून 10, 2008

खुदा को खुदी से प्यार का बहाना चाहिए था ,

सो हम तुम को ख़ुद से बांटकर,

और थोड़ा कांट छाँट कर,

एक दूसरे से रु-ब-रु खड़ा कर दिया,

अफसोस हम खुदाई नूर को उम्रभर तलाशते रहे ,

मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजों में भटकते रहे,

और खुदा हमारे प्यार को तरसते रहे।

2 टिप्‍पणियां:

डॉ .अनुराग ने कहा…

kya bat hai.....

Udan Tashtari ने कहा…

वाह! बहुत बढ़िया.