सोमवार, जून 02, 2008

उन्हें हमारा हँसना इतना नागवार गुज़रा,

बुला के , वफ़ा का वास्ता दे , ज़िंदगी भर के लिए रुला छोड़ा।

2 टिप्‍पणियां:

रवि रतलामी ने कहा…

आज यहाँ एक अजीब बात हो गई
एक शेर पूरी की पूरी ग़ज़ल हो गई

Jyoti ने कहा…

आप जैसे वरिष्ठ चिट्ठाकार का मेरे ब्लॉग पे आना
मेरे लिए यही बड़े गर्व की बात है ... आपके शब्दों के लिए धन्यवाद।